यह लेख आपको मोटापा कम करने का एक आसान तरीका बताएगा। इसमें वैज्ञानिक तथ्यों और व्यवहारिक रणनीतियों के आधार पर कदम दिए गए हैं। ये कदम दैनिक जीवन में आसानी से लागू किए जा सकते हैं।
इस लेख में वजन कम करने के उपाय, डायट प्लान, आदतें, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव मिलेंगे। यह आपको स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
यह उपाय भारत के लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं। स्थानीय भोजन, व्यस्त दिनचर्या और घरेलू संसाधनों को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिए गए हैं। सलाह WHO और Indian Dietetic Association के दिशानिर्देशों के अनुसार हैं।
नीचे दी गई विधियाँ व्यवहारिक और सुलभ हैं। ये छोटे-छोटे बदलावों पर आधारित हैं। आप धीरे-धीरे मोटापा कम कर सकते हैं और स्वस्थ जीवनशैली अपना सकते हैं।

मुख्य बातें
- लेख में पेश किए गए उपाय वैज्ञानिक और व्यवहारिक दोनों होंगे।
- दैनिक आदतें, डायट प्लान और व्यायाम पर सरल निर्देश मिलेंगे।
- सलाहें भारत की जीवनशैली और भोजन संस्कृति के अनुरूप हैं।
- WHO और Indian Dietetic Association के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा।
- लक्ष्य टिकाऊ परिवर्तन और स्वस्थ जीवनशैली पर केंद्रित है।
मोटापा कम करने का रामबाण उपाय
यह उपाय वजन घटाने का एक तरीका नहीं है, बल्कि शरीर को स्वस्थ बनाने का एक तरीका है। यह दिनचर्या में छोटे बदलाव लाता है। इससे लोग लंबे समय तक स्वस्थ वजन बनाए रख सकते हैं।
इस उपाय का वैज्ञानिक आधार
वज़न घटाने का मूल सिद्धांत कैलोरी बैलेंस है। यह बात विज्ञान द्वारा साबित की जाती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग, उच्च-प्रोटीन आहार और उच्च-घनत्व फाइबर वाले आहार विज्ञान से समर्थित हैं। PubMed और Nutrition Journal के निष्कर्ष बताते हैं कि ये विधियां नियमित व्यायाम के साथ लंबे समय तक काम करती हैं।
सूजन घटाना और हॉर्मोनल बैलेंस भी महत्वपूर्ण हैं। तनाव हार्मोन कॉर्टिसॉल को नियंत्रित करना और पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। विटामिन D और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व भी शरीर को स्वस्थ बनाते हैं।
किस प्रकार यह सामान्य डायट और एक्सरसाइज से अलग है
यह तरीका तात्कालिक फिक्स या अत्यधिक प्रतिबंधित डाइट से अलग है। यह जीवनशैली को अनुकूल बनाने पर ध्यान देता है।
यह ऊर्जा स्तर और भूख नियंत्रण में सुधार करने पर केंद्रित है। नियमों की बजाय, खाद्य गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है। इससे लंबे समय तक स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद मिलती है।
भारतीय आहार में सुधार के लिए सुझाव दिए जाते हैं। तले हुए भोजन में कमी, रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ या फल, और देसी दालें और सब्जियाँ बढ़ाना सुझावित है। ये बदलाव सरल हैं और रोजमर्रा के खाने में आसानी से मिल जाते हैं।
किसे इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
कुछ समूहों के लिए डॉक्टर की सलाह आवश्यक है। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, मधुमेह के मरीज, और हार्ट डिजीज वाले लोग सावधानी से आगे बढ़ें।
किडनी या लिवर की समस्या वाले लोग और अत्यधिक कम या अधिक BMI वाले व्यक्ति डाइट बदलने से पहले जांच कराएं। यदि कोई थायरॉयड, एंटीडिप्रेशन दवाएँ या स्टेरॉयड्स लेता है, तो डायटिशियन या चिकित्सक से मार्गदर्शन लें।
यदि तेज़ थकान, चक्कर आना, या अनियमित दिल की धड़कन जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ताकि सुरक्षित तरीके से लक्ष्य की ओर बढ़ाया जा सके और शरीर की सेहत बनी रहे।
वजन कम करने के उपाय जो हर दिन अपनाए जा सकते हैं
दिनभर की छोटी-छोटी आदतें बड़ा फर्क ला सकती हैं। रोजमर्रा के व्यवहार में छोटे बदलाव से वजन कम हो सकता है। यह आपको स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाता है।
सुबह की आदतें: पानी, हल्का व्यायाम और ब्रेकफास्ट टिप्स
सुबह 300–500 मिली पानी पीना हाइड्रेशन और मेटाबॉलिज़्म को दोनों को बढ़ावा देता है।
20–30 मिनट का हल्का व्यायाम, जैसे तेज वॉक या योगा, ब्लड शुगर को संतुलित रखता है।
ब्रेकफास्ट में अंडा, दही, पनीर, ओट्स या मूंग दाल चीला खाएं। यह दिनभर भूख को नियंत्रित करता है और वजन कम करने में मदद करता है।
दिनभर एनर्जी बढ़ाने वाले स्नैक्स और शारीरिक गतिविधि
भुने चने, मिक्स्ड नट्स, फल और ग्रीक योगर्ट जैसे स्मार्ट स्नैक्स चुनें। ये कम कैलोरी में पोषण प्रदान करते हैं।
हर 60–90 मिनट में 2–5 मिनट की हल्की गतिविधि करें। स्ट्रेचिंग, थोड़ी चैढ़ाई या चारों ओर चलना बैठने की समस्या को कम करता है।
लंच में सब्जियाँ और सलाद शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड और फास्ट फूड से बचें। छोटे-छोटे बदलाव से वजन कम करना आसान हो जाता है।
रात में सही खाना और नींद के महत्व
रात का खाना हल्का और प्रोटीन-फाइबर वाला होना चाहिए। सोने से 2–3 घंटे पहले खाना खत्म करें।
सात से आठ घंटे की नींद मेटाबॉलिज़्म और भूख को नियंत्रित करती है। खराब नींद से वजन बढ़ सकता है।
नींद से पहले स्क्रीन टाइम कम करें। काढ़ा या हर्बल टी पिएं ताकि आरामदायक नींद मिले।
| समय | क्या करें | फायदा |
|---|---|---|
| सुबह | 300–500 मिली पानी, 20–30 मिनट हल्का व्यायाम, प्रोटीन-फाइबर ब्रेकफास्ट | मेटाबॉलिज़्म एक्टिव, भूख नियंत्रित, वजन कम करने के उपाय में मदद |
| दोपहर | सब्जियों वाला लंच, स्मार्ट स्नैक्स (भुने चने, फल, नट्स) | ऊर्जा बनी रहती है, अनावश्यक कैलोरी कम |
| काम के बीच | हर 60–90 मिनट पर 2–5 मिनट हल्की एक्टिविटी | रक्त संचार बेहतर, बैठने से जुड़ी समस्याएँ घटती हैं |
| रात | हल्का प्रोटीन-फाइबर रात का खाना, सोने से पहले स्क्रीन कम | बेहतर नींद, भूख हार्मोन संतुलित, वजन घटाएं में सहायता |
डायट प्लान और न्यूट्रिशन टिप्स
सही डायट प्लान और न्यूट्रिशन टिप्स वजन घटाने में मदद करते हैं। छोटे बदलाव रोज़मर्रा की आदतों को बदल देते हैं। घर पर आसानी से अपनाए जा सकते हैं।

कम कैलोरी लेकिन पौष्टिक भोजन के विकल्प
सब्जियों पर आधारित थाली रखें। दालें, सूप और सलाद पेट को जल्दी भरते हैं।
ग्रिल्ड या ओवन-भुना हुआ चिकन और फिश प्रोटीन देते हैं। वे मोटापा कम करने के लिए अच्छे विकल्प हैं।
साबुत अनाज चुनें — ब्राउन राइस, ज्वार, बाजरा और ओट्स। तलने की बजाय स्टीम और बेकिंग अपनाएँ। टोफू या सोया ब्रॉक्स शाकाहारी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा का सही संतुलन
हर भोजन में प्रोटीन शामिल करें। अंडे, पनीर, दालें, चिकन और फिश से प्रोटीन मिलता है।
दिनभर 25–35 ग्राम फाइबर लक्ष्य रखें। सब्जियाँ, फल और साबुत अनाज भूख कम करते हैं।
स्वस्थ वसा सीमित मात्रा में लें। एवोकाडो, अलसी या चिया बीज और अखरोट पोषण देते हैं। ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड स्नैक्स से बचें।
स्मार्ट भोजन योजना: कब क्या खाएं और हिस्से कितने होने चाहिए
नाश्ते में उच्च प्रोटीन और मध्यम कार्बोहाइड्रेट लें। यह दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है।
दोपहर की प्लेट में आधा हिस्सा सब्जियाँ, चार में से एक हिस्सा साबुत अनाज और एक हिस्सा प्रोटीन रखें। यह सरल नियम डायट प्लान को टिकाऊ बनाता है।
शाम का स्नैक हल्का रखें। रात का भोजन जल्दी और हल्का लें।
पोर्टियन कंट्रोल के लिए प्लेट मेथड अपनाएँ। हाथ की हथेली = प्रोटीन, मुट्ठी = कार्ब्स, अंगूठा = वसा। हाइड्रेशन पर ध्यान दें और दिनभर 2–3 लीटर पानी पिएँ।
व्यायाम और गतिशीलता: वजन घटाने की अनिवार्य रणनीति
रोज़मर्रा की गति और स्ट्रेंथ जोड़ना सबसे अच्छा है। व्यायाम से कैलोरी जलती है और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। घर या पार्क में सरल तरीक़े अपनाएं।

कार्डियो और स्टेंथ ट्रेनिंग का संयोजन
कार्डियो गतिविधियाँ जैसे तेज़ वॉक और जॉगिंग कैलोरी जलाती हैं। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का समय दें।
स्टेंथ ट्रेनिंग में वजन उठाना और बॉडीवेट एक्सरसाइज शामिल हैं। ये मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और मेटाबॉलिक रेट बढ़ाते हैं।
घरेलू वर्कआउट और आसान स्ट्रेचिंग रूटीन
घर पर बिना जिम उपकरण के भी व्यायाम कर सकते हैं। स्क्वाट्स और लंजेस जैसे व्यायाम करें। छोटे डम्बल या रेसिस्टेंस बैंड भी उपयोगी हैं।
सुबह या शाम को 10–15 मिनट स्ट्रेचिंग करें। यह कमर और कंधों की लोच बढ़ाता है। योग भी लचीलापन और शांति देता है।
साप्ताहिक ट्रेनिंग शेड्यूल और प्रोग्रेस मॉनिटरिंग
एक सरल शेड्यूल में 3 दिन कार्डियो, 2 दिन स्टेंथ और 2 दिन सक्रिय रिकवरी रखें। सक्रिय रिकवरी में लंबी वॉक या हल्का योग करें।
प्रगति को वजन से नहीं मापें। कमर और हिप के माप लें और शरीर का वसा प्रतिशत देखें। Google Fit और HealthifyMe ऐप्स मददगार हैं।
| लक्ष्य | साप्ताहिक अवधि | उपयुक्त गतिविधियाँ |
|---|---|---|
| देर तक स्टैमिना बनाना | 150 मिनट मध्यम कार्डियो | तेज़ वॉक, साइकलिंग, जॉगिंग |
| मसल मास बनाए रखना | 2–3 सत्र/सप्ताह | वेट ट्रेनिंग, बॉडीवेट एक्सरसाइज |
| त्वरित कैलोरी बर्न | 2–3 HIIT सत्र/सप्ताह | शॉर्ट उच्च-तीव्रता इंटरवल |
| लचीलापन और रिकवरी | 2 दिन सक्रिय रिकवरी | योग, लंबी वॉक, स्ट्रेचिंग |
इन तरीकों को अपनाकर व्यायाम को रोज़मर्रा की आदत बनाएं। छोटे-छोटे बदलाव वजन कम करने में मदद करते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली परिवर्तन
वज़न घटाने के लिए शारीरिक प्रयास जरूरी है। लेकिन मानसिक स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण है। जब आप मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं, तो निर्णय लेना आसान हो जाता है।
इस तरह, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी आसान हो जाता है। छोटे-छोटे बदलाव रोजमर्रा के जीवन में बड़ा अंतर ला सकते हैं। ये बदलाव लंबे समय तक मोटापा कम करने में मदद करते हैं।
स्ट्रेस मैनेजमेंट और माइंडफुल ईटिंग
तनाव से इमोशनल ईटिंग हो सकती है। गहरी साँस लेना, पांच मिनट का ध्यान देना, या प्रोग्रेसिव मांसपेशी रिलैक्सेशन तनाव कम कर सकते हैं।
माइंडफुल ईटिंग मतलब हर कौर को महसूस करके खाना। धीरे-धीरे चबाएँ और भूख व तृप्ति के संकेत समझें। इससे ओवरइटिंग कम होती है और भोजन का आनंद बढ़ता है।
यदि डिप्रेशन या चिन्ता के लक्षण हों, तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लें। मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से खाने की आदतें और वजन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
लक्ष्य निर्धारण और मोटिवेशन बनाए रखने के तरीके
SMART तरीके से लक्ष्य बनाएं: स्पष्ट, मापने योग्य और समयबद्ध। उदाहरण के लिए, "अगले 4 सप्ताह में सप्ताह में 3 बार 30 मिनट वॉक" जैसी आदतें लंबी दूरी के लक्ष्य को सुलभ बनाती हैं।
छोटे इनाम और ट्रैकिंग से प्रेरणा बनी रहती है। ऐप, डायरी या फिटनेस बैंड से प्रगति देखें। रोल मॉडल और वास्तविक सफलता की कहानियाँ प्रेरणा देती हैं, पर अपनी तुलना दूसरों से न करें।
समाज, परिवार और समर्थन प्रणाली का प्रभाव
घर का माहौल बदलाव में बड़ा भूमिका निभाता है। परिवार जब रसोई में हेल्दी विकल्प रखता है और व्यायाम के समय का समर्थन करता है, तो स्वस्थ जीवनशैली अपनाना आसान होता है।
मित्रों या समूहों के साथ वॉक ग्रुप, जिम क्लास या व्हाट्सएप हेल्थ ग्रुप में जुड़ने से जवाबदेही बढ़ती है। ऑफिस में भी स्टैंड-अप ब्रेक्स और हेल्दी लंच विकल्प कार्यस्थल को सहायक बनाते हैं।
इन मनोवैज्ञानिक और सामाजिक रणनीतियों को मिलाकर अपनाने से मानसिक स्वास्थ्य मजबूत रहता है। इससे मोटापा कम करने का रामबाण उपाय अधिक प्रभावी होता है।
निष्कर्ष
इस लेख में मोटापा कम करने का तरीका दिया गया है। इसमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार का महत्व बताया गया है। ये सभी कदम दीर्घकाल तक सुरक्षित और प्रभावी होते हैं।
आज ही अपनाएँ छोटे कदम: पानी पिएं, सुबह टहलें, दिन में स्वस्थ स्नैक लें और नियमित रूप से सोएं। ये छोटे बदलाव समय के साथ बड़े आदतें बन जाते हैं।
यदि आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है या आप दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर या डायटिशियन से बात करें। कुछ मामलों में व्यक्तिगत सलाह और निगरानी की जरूरत होती है।
वजन घटाना एक यात्रा है। तात्कालिक नतीजों की बजाय, टिकाऊ आदतें अपनाएँ। धीरे-धीरे परिवर्तन स्थायी होते हैं और आप स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ते हैं।
FAQ
मोटापा कम करने का यह रामबाण उपाय क्या है?
यह एक समग्र रणनीति है। इसमें कैलोरी बैलेंस, मेटाबॉलिज़्म सुधार, और उच्च-प्रोटीन व हाई-फाइबर आहार शामिल हैं। नियमित व्यायाम भी इसमें महत्वपूर्ण है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग, सूजन घटाने के उपाय, और पर्याप्त नींद भी इसमें शामिल हैं। व्यवहारिक बदलाव भी इसमें महत्वपूर्ण हैं।
यह तरीका सामान्य डायट और एक्सरसाइज से कैसे अलग है?
यह तरीका सामान्य डायट और एक्सरसाइज से अलग है। यह जीवनशैली-अनुकूल आदतों पर ध्यान केंद्रित करता है।
यह ऊर्जा स्तर, भूख नियंत्रण, और मनोवैज्ञानिक सहनशीलता पर जोर देता है। भारतीय भोजन पद्धति के अनुसार परिवर्तन भी इसमें शामिल हैं।
कौन-कौन से वैज्ञानिक सिद्धांत इसका आधार हैं?
मुख्य आधार कैलोरी बैलेंस और मसल मास बनाना है। यह रेस्टिंग मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है।
इंसुलिन सेंसिटिविटी, थर्मोजेनेसिस, और प्रोटीन-समृद्ध आहार भी इसमें महत्वपूर्ण हैं। फाइबर, नियमित व्यायाम, विटामिन D, ओमेगा-3, और तनाव/नींद का हॉर्मोनल संतुलन भी इसमें शामिल हैं।
इसे अपनाने से पहले किन लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
गर्भवती या स्तनपान कराती महिलाएँ, मधुमेह, हृदय रोग, किडनी/लिवर डिसऑर्डर वाले लोग, और जो दवाईयां लेते हैं—इन्हें पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
किसी भी तीव्र लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
रोज़मर्रा की किन आदतों से वजन घटाने में मदद मिलेगी?
सुबह उठकर 300–500 मिली पानी पीना और 20–30 मिनट हल्का व्यायाम करना मददगार है। उच्च-प्रोटीन व फाइबरयुक्त नाश्ता भी महत्वपूर्ण है।
हर 60–90 मिनट हल्की एक्टिविटी और रात में हल्का प्रोटीन-फाइबर डिनर भी महत्वपूर्ण है। 7–8 घंटे नींद भी जरूरी है।
डायट प्लान में किन खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें?
साबुत अनाज, दालें, सब्जियाँ, फल, अंडा, पनीर, चिकन/फिश/सोया, एवोकाडो व नट्स को प्राथमिकता दें।
रिफाइंड कार्ब्स, ट्रांस फैट, और प्रोसेस्ड स्नैक्स से बचें। तेल का उपयोग सीमित करें।
प्रोटीन, फाइबर और वसा का संतुलन कैसे रखें?
हर भोजन में प्रोटीन शामिल करें। आयु और गतिविधि के अनुसार लगभग 0.8–1.2 g/kg प्रोटीन लें।
फाइबर 25–35 g प्रतिदिन का लक्ष्य रखें। सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, और दालें फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
स्वस्थ वसा सीमित मात्रा में लें। ट्रांस फैट से बचें। प्लेट मेथड उपयोगी है।
व्यायाम कार्यक्रम में क्या शामिल होना चाहिए?
कार्डियो 150 मिनट मध्यम-तीव्रता या 75 मिनट उच्च-तीव्रता के बराबर होना चाहिए। स्टेंथ ट्रेनिंग सप्ताह में 2–3 सत्र होना जरूरी है।
HIIT उपयोगी है। घरेलू वर्कआउट और योग/स्ट्रेचिंग भी शामिल करें।
बिना जिम के घरेलू वर्कआउट कैसे करें?
बॉडीवेट एक्सरसाइज जैसे स्क्वाट्स, लंजेस, पुस-अप्स, प्लैन्क्स, और बर्ड-डॉग करें।
डम्बल या रेसिस्टेंस बैंड का उपयोग करें। सुबह या शाम 10–15 मिनट डायनामिक स्ट्रेचिंग करें।
नियमितता और धीरे-धीरे प्रोग्रेसिव औवरलोड से परिणाम मिलते हैं।
प्रगति को कैसे मॉनिटर करें—क्या सिर्फ वजन ही माप है?
नहीं। वजन के साथ कमर-हिप माप, शरीर में वसा प्रतिशत, और फिटनेस स्तर भी देखें।
साप्ताहिक छोटी-छोटी जाँच और मासिक समीक्षा सबसे व्यावहारिक है। HealthifyMe या Google Fit जैसे ऐप्स मददगार हैं।
मानसिक स्वास्थ्य का वजन घटाने में क्या योगदान है?
स्ट्रेस, नींद की कमी, और भावनात्मक खान-पान वजन और हार्मोन्स को प्रभावित करते हैं।
माइंडफुल ईटिंग, मेडिटेशन, गहरी साँस, और पर्याप्त नींद वजन नियंत्रण में सहायक हैं।
क्या छोटे-छोटे लक्ष्य महत्वपूर्ण हैं और प्रेरणा कैसे बनाये रखें?
हां। SMART लक्ष्य (छोटे, मापनीय, हासिल करने योग्य) बनाएं। उदाहरण: “अगले 4 हफ्तों में सप्ताह में 3 बार 30 मिनट वॉक”।
ट्रैकिंग, छोटे इनाम, और समर्थन समूह/फैमिली अकाउंटबिलिटी से प्रेरणा मिलती है। तुलना से बचें और सतत बदलाव पर ध्यान दें।
किस तरह के खाद्य-न्यवेशन टिप्स रोज़मर्रा में तुरंत लागू किए जा सकते हैं?
सफेद राइस/ब्रेड की जगह साबुत अनाज लें। तले हुए की जगह ओवन/ग्रिल करें।
रिफाइंड चीनी की जगह गुड़/फल इस्तेमाल करें। स्नैक्स में भुने चने/फ्रूट्स चुनें। पानी की मात्रा बढ़ाएं।
प्लेट मेथड और हाथ-आधारित पोर्शन माप उपयोगी हैं।
कौन से संकेत हैं जिन पर तुरंत डॉक्टरी मदद लें?
अत्यधिक थकान, चक्कर आना, हृदय की अनियमित धड़कन, और साँस लेने में कठिनाई पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अचानक वजन में तेज घटाव या कोई गंभीर रोग प्रतिक्रिया पर भी तुरंत डॉक्टर को बताएं।
इससे जुड़ी सामान्य मिथक क्या हैं?
कुछ आम मिथक हैं: "केवल कम कैलोरी से ही स्थायी नतीजा" और "केवल कार्डियो ही पर्याप्त है"।
अस्थायी रहिती है। व्यवहारिक, व्यवहार-आधारित बदलाव अधिक टिकाऊ होते हैं।
यह योजना भारतीय जीवनशैली के अनुसार कितनी व्यवहारिक है?
बहुत व्यवहारिक। सुझाव स्थानीय भारतीय खाद्य विकल्पों के अनुसार हैं।
देसी दालें, सब्जियाँ, ज्वार-बाजरा, गुड़/फल, और सरल पकाने के विकल्प इसमें शामिल हैं।
व्यस्त दिनचर्या वाले लोगों के लिए छोटे HIIT सत्र और भोजन योजना भी दी गई है।
क्या कोई आधिकारिक दिशानिर्देश जिनका पालन इस उपाय में किया गया है?
हाँ। यह उपाय WHO के सामान्य दिशा-निर्देशों और इंडियन डायटेटिक्स एसोसिएशन के सिफारिशों से मेल खाता है।
सुरक्षित कैलोरी-डिफिसिट, संतुलित न्यूट्रिशन, फिजिकल एक्टिविटी, और क्लिनिकल कंडिशन के अनुसार कस्टमाइजेशन पर जोर दिया गया है।
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